रायपुर: छत्तीसगढ़ के पत्रकार जगत के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। राज्य सरकार ने बहुप्रतीक्षित ‘छत्तीसगढ़ मीडिया कर्मी सुरक्षा कानून’ को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। इसी के साथ छत्तीसगढ़, पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाने वाले देश के चुनिंदा राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है
इस कानून का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों के खिलाफ होने वाली हिंसा, डराने-धमकाने और झूठे मुकदमों पर लगाम लगाना है।
कानून की मुख्य विशेषताएं
यह कानून केवल बड़े मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रिंगर्स पर भी लागू होगा।
पंजीकरण अनिवार्य: राज्य स्तर पर एक ‘मीडिया रजिस्टर’ बनाया जाएगा, जिसमें सभी पत्रकारों का विवरण होगा।
सुरक्षा समिति का गठन: पत्रकारों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी, जिसमें पत्रकार और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
कठोर दंडात्मक प्रावधान: पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार या उनके काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारों का संरक्षण: यदि किसी पत्रकार को उसके काम के कारण निशाना बनाया जाता है, तो उसे शासन की ओर से कानूनी और सुरक्षा सहायता प्रदान की जाएगी।
क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत?
पिछले कुछ वर्षों में बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों और शहरी इलाकों में भी पत्रकारों पर हमलों और दबाव की खबरें बढ़ती जा रही थीं। पत्रकार संगठनों की लंबे समय से मांग थी कि उनके लिए एक ऐसा कानून हो जो उन्हें बिना किसी डर के निष्पक्ष पत्रकारिता करने की आजादी दे।
”लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है। यह कानून पत्रकारों को एक ऐसा माहौल देगा जहां वे बिना किसी बाहरी दबाव के सच को सामने ला सकें।” — शासन का आधिकारिक वक्तव्य
पत्रकारों में हर्ष की लहर
इस कानून के लागू होने के बाद रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर सहित विभिन्न जिलों के प्रेस क्लबों में खुशी का माहौल है। पत्रकार संगठनों ने इसे ‘प्रेस की स्वतंत्रता की जीत’ बताया है।
