कोरबा देशभर स्वच्छता की सेवा अभियान चल रहा है। हर ओर अभियान का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। इस अभियान की सफलता को ले सरकारी महकमे के आला अधिकारी लोगों को स्वच्छ एवं जागरूक बनने की प्रेरणा देते नजर आ रहे हैं। वही स्वच्छता अभियान की लफ्फाजी और जमीनी हकीकत प्रखंड में इसके सफलता की कलई खोल कर रख देती है।
प्रखंड में स्वच्छता जागरूकता को लेकर पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, बुद्धिजीवी द्वारा कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं बावजूद इसके पूर्व माध्यमिक शाला तूमान बस स्टैंड, सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी का ढेर लगा है तथा यह सार्वजनिक स्थल कूड़ेदान बना हुआ है। पान की पीक ,गुटखे व खैनी की थूक से दीवारों पर उभर आई हैं आकृतियां इन कचरों के ढेर से निकलने वाले बदबू से आमजन परेशान हैं। गंदगी एवं बदबू से विद्यालयों में जाने वाले बच्चों के साथ आम लोगों को भी काफी परेशानी हो रही है। लोग इसके आसपास खड़े होने से भी कतराते हैं। बस स्टैंड के दोनों और पान की पीक, गुटखे व खैनी की थूक से दीवारों पर कई तरह की आकृतियां उभर आई है।स्वच्छ भारत के दौर में यहां पहुंचने वाले लोगों का स्वागत,यही भद्दी आकृतियां करती है।
बच्चों को किताबों में स्वच्छता का पाठ भले ही पढ़ाया जा रहा हो लेकिन विद्यालयों के इर्द-गिर्द कचरे का ढ़ेर लगा हुआ है। ऐसे में बच्चों को जब विद्यालय के सामने ही गंदगी का अंबार दिखेगा तो वह कैसे अपने जीवन में स्वच्छता का माहौल पैदा करेगा। शिक्षा के मंदिर में बच्चें बस किताबी शिक्षा से ही रूबरू हो रहे हैं लेकिन जगह-जगह गंदगी के अंबार से बेहतर माहौल नहीं मिल रहा है।कुछ ऐसा ही हाल है विद्यालय परिसर का। इस पर विद्यालय परिसर में गंदगी का अंबार लगा है। ऐसे में देश के नौनिहाल किस स्वस्थ वातावरण में कैसे पठन-पाठन करते होंगे, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। सबसे ज्यादा सोचने की बात यह है कि इस परिसर से सटे मार्ग से जिम्मेदारों का हमेशा आना जाना लगा रहता है परंतु फिर भी यहां पड़े कचरे पर किसी का ध्यान नहीं नहीं दिया जा रहा है परिसर को कूड़ेदान बना दिया है। कचरे के ढेर से कई बीमारियां पनप रही है।


